Monday, 27 July 2015

लहू और शराब

फर्क नहीं कोई अब लहू और शराब में,
जब न हो रगों में तो बेखुदी छा जाती है  ।

-पुलस्तय

मेरा ग़म

यूँ ही अक्सर जब मैं बे-खुदी में मुस्कुराता हूँ ,
दिल में छुपाई तेरी तस्वीर आँखों पे लगाता हूँ....
बस कुछ और सबब नहीं है मेरी ग़मजदगी का,
पटकने के बहाने सर तेरे सिजदे मैं झुकाता हूँ  ।

-पुलस्तय

नूंर

सुबह ही से नूर छलक रहा है मेरी आँखों से,
 एक चाँद चमकता रहा ख्वाबो में रात भर  ।

-पुलस्तय

Saathi deewano ke naam--



हौंसला बन गया मेरा भी, तुमको पत्थरों से लिपट रोतें देख कर,
वरना इस  शहर में बुतपरस्तों  को  लोग काफिर समझते हैं ।  

-पुलस्तय

उदासी

कहीं कुछ न कुछ तो बात है 
होठो पे हंसी, ऑंखें उदास हैं ....
इतना तो न बोलती थी तुम 
अब हर बात पे कुछ कहती हो,
तब हर लफ़्ज़ खनकता था
अब जो कहती हो दास्ताँ, उदास है.....

-पुलस्तय

Thursday, 26 March 2015

पड़ोस की साँवली लड़की

रसोई में जब मेरी माँ का हाथ बटाती हो,
न जाने मुझे ऐसा क्यों लगता है के 
तुम मुझ पर अपना हक़ जताती हो 

नज़रें उठा के देखा न मुझसे बात की कभी,
पर दिल कहता है की मेरा हाल लेने ही
रोज बहाने से मेरे घर आती हो 

झुकी हुई डरी डरी आँखे ये तुम्हारी,
दिल में दबी चाहा आँखों से छलकेगी
ये सोच के आजकल सबसे नज़रे चुराती हो 

दबा दबा सा रंग रूप ना जुल्फे ही रेशमी है,
पर मासूम उम्मीदों की दो बूँद 
अपनी आहटों से छलका मेरे घर को महकाती हो 

तेरे असर से रातों में चांदनी का रंग कुछ और है 
शायद चाँद के चहरे पे भी लिपटा हुआ 
तेरे दुप्पट्टे का छोर है

-पुलस्त्य