Wednesday, 27 August 2014

शहादत

नक्श पैने है उनके, जैसे खंजर की धार
नैयनन काजल रेखा, मानो तेज तलवार
मुड़ - मुड़ यूँ देखना, सधे तीरों का वार
दिल वाले खूब लड़ें, पर होती उनकी हार 
कर जिगर चाक मेरा, हुस्नवाले अबकी बार ।

-पुलस्त्य






  

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राह नहीं, मंजिल नहीं, कोई उम्मीद भी नहीं,
दिल भुला धड़कना बस साँस चलती जाती है,
अब मौत से ही पूछे कोई मेरे जीने का सबब, 
अरसा हुआ जिंदगी तो नज़रें फिराए बैठी है ।

-पुलस्त्य
    

Saturday, 9 August 2014

प्यास

मज़ा तो इस प्यास  में है  शराब में कहाँ  ....
दो घूँट पीता हूँ इस उम्मीद में, प्यास की इंतिहा छूने के लिए 
शायद फिर जगे एक नयी प्यास कुछ और देर जीने के लिए ।

-पुलस्त्य

तू

तू क्या है ? कुछ भी तो नहीं ! 
तू घटा नहीं, तू हवा नहीं, तू फ़िज़ा भी नहीं,
ये सब तो मेरे ख़्याल हैं । इस दिल का बुना हुआ वबाल हैं ।

इन आँखों में है तो तू एक ख्वाब है !
जुस्तजु है मेरी साँसों में, तो नाम तेरा गुलाब है,
न लड़खड़ाएं ये कदम मेरे अगर, तो तु कहाँ की शराब है ।

मेरी दीवानगी पे मेरा बसर नहीं !
जवानी के दौर में शायद, सुकून-ऐ-दिल मयसर नहीं,
न उछले रगों में मेरा लहू तो, तू वो शय है जिसमे  कोई असर नहीं ।

मेरे जूनून ही से उठी तेरी रानाई है,
मेरी बंदगी के असर ही से क़ायम तेरी खुदाई है 
न लूटा एक जरा सी बात पर, फ़क़त मेरा ईश्क़ ही बस तेरी कमाई है ।

-पुलस्त्य


वबाल- Problem
जुस्तजु- Desire
बसर- Control
रानाई- Beauty 
बंदगी- Devotion