मज़ा तो इस प्यास में है शराब में कहाँ ....
दो घूँट पीता हूँ इस उम्मीद में, प्यास की इंतिहा छूने के लिए
शायद फिर जगे एक नयी प्यास कुछ और देर जीने के लिए ।
-पुलस्त्य
दो घूँट पीता हूँ इस उम्मीद में, प्यास की इंतिहा छूने के लिए
शायद फिर जगे एक नयी प्यास कुछ और देर जीने के लिए ।
-पुलस्त्य
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