Sunday, 22 June 2014

असर

अरसा हुआ के तू जुदा हो गयी 
पर हर रात शायद नींद में तेरा नाम लेता हूँ मै,
खून छलक आता है खुश्क लबों पे 
और रिसते लहुँ को तेरा बोसा मान लेता हूँ मै,
आज भी वो ही असर है तेरा मुझ पे
मेरी बर्बादियों के इशारे से ये जान लेता हूँ मै,
जली मिलती हैं उंगलिया उस सवेरे 
ख्वाब मैं जिस रात हाथ तेरा थाम लेता हूँ मै ।

-पुलस्त्य

चाँद और आशिक

चंदा और आिशक की तासीर एक है
हर रात यूँ जलना फिर राख हो जाना़ .....
दोनों की तक़दीर एक है ।

दोनो उठाते हैं जुनूँ की तोहमत 
और दाग़ अगर दामन क़े जो देखें तो ..... 
दोनों की तस्वीर एक है ।

ये  आसमानो में है
और उसका भी रुतबा है बहोत 
गौर से अगर देखे 
दोनों क़े पांव में ज़ंजीर एक है

-पुलस्त्य
  

Tuesday, 3 June 2014

याद

तुझको याद मैं इस तरह कर रहा हूँ 
के क़तरा क़तरा हर रोज  मर रहा हूँ,
तेरी यादों के मज़ार पर, बिना नागा 
टुकड़ो में खुद को अदा कर रहा हूँ  ।

हर रात मौत की परी ख्वाब में आती है
ले आगोश में ग़म मिटाने को लुभाती है
न जीना पड़े बेबसी के और चार दिन
अब तो हर दम यही दुआ कर रहा हूँ ।

-पुलस्त्य