Sunday, 22 June 2014

असर

अरसा हुआ के तू जुदा हो गयी 
पर हर रात शायद नींद में तेरा नाम लेता हूँ मै,
खून छलक आता है खुश्क लबों पे 
और रिसते लहुँ को तेरा बोसा मान लेता हूँ मै,
आज भी वो ही असर है तेरा मुझ पे
मेरी बर्बादियों के इशारे से ये जान लेता हूँ मै,
जली मिलती हैं उंगलिया उस सवेरे 
ख्वाब मैं जिस रात हाथ तेरा थाम लेता हूँ मै ।

-पुलस्त्य

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