Monday, 27 July 2015

लहू और शराब

फर्क नहीं कोई अब लहू और शराब में,
जब न हो रगों में तो बेखुदी छा जाती है  ।

-पुलस्तय

मेरा ग़म

यूँ ही अक्सर जब मैं बे-खुदी में मुस्कुराता हूँ ,
दिल में छुपाई तेरी तस्वीर आँखों पे लगाता हूँ....
बस कुछ और सबब नहीं है मेरी ग़मजदगी का,
पटकने के बहाने सर तेरे सिजदे मैं झुकाता हूँ  ।

-पुलस्तय

नूंर

सुबह ही से नूर छलक रहा है मेरी आँखों से,
 एक चाँद चमकता रहा ख्वाबो में रात भर  ।

-पुलस्तय

Saathi deewano ke naam--



हौंसला बन गया मेरा भी, तुमको पत्थरों से लिपट रोतें देख कर,
वरना इस  शहर में बुतपरस्तों  को  लोग काफिर समझते हैं ।  

-पुलस्तय

उदासी

कहीं कुछ न कुछ तो बात है 
होठो पे हंसी, ऑंखें उदास हैं ....
इतना तो न बोलती थी तुम 
अब हर बात पे कुछ कहती हो,
तब हर लफ़्ज़ खनकता था
अब जो कहती हो दास्ताँ, उदास है.....

-पुलस्तय