यूँ ही अक्सर जब मैं बे-खुदी में मुस्कुराता हूँ , दिल में छुपाई तेरी तस्वीर आँखों पे लगाता हूँ.... बस कुछ और सबब नहीं है मेरी ग़मजदगी का, पटकने के बहाने सर तेरे सिजदे मैं झुकाता हूँ । -पुलस्तय
कहीं कुछ न कुछ तो बात है होठो पे हंसी, ऑंखें उदास हैं .... इतना तो न बोलती थी तुम अब हर बात पे कुछ कहती हो, तब हर लफ़्ज़ खनकता था अब जो कहती हो दास्ताँ, उदास है..... -पुलस्तय