ऐ मेरी कल्पना!
आधे चाँद के तालाव के
ठोर पे बैठ
जब तुम ख़ुद को
चाँदनी में निहारती हो
तो न जाने कितने सितारे
तुम्हारा अक्स बनने की होड़ में
चाँद मे कूद पड़ते हैं,
और जब चाँद
सितारों से लबालब भर जाता है
तो सतह पे चमकता
तुम्हारा चेहरा
पूर्णिमा कहलाता है ।
-पुलस्तय
आधे चाँद के तालाव के
ठोर पे बैठ
जब तुम ख़ुद को
चाँदनी में निहारती हो
तो न जाने कितने सितारे
तुम्हारा अक्स बनने की होड़ में
चाँद मे कूद पड़ते हैं,
और जब चाँद
सितारों से लबालब भर जाता है
तो सतह पे चमकता
तुम्हारा चेहरा
पूर्णिमा कहलाता है ।
-पुलस्तय
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