कुछ शेंर
नहीं मंजूर
मुझको खुदा होना सिज़दे में तेरा सर झुकवाने को
बना सको तो
अपनी माला का मोती बना लो सीने से लगाने को।
यूँ तकी तेरी रहा
पत्थरा गयी आँखें मेरी, बरसों के इंतजार में,
बेबसी ओढ़कर
तू बस जार जार रोती रही, तेरे इकरार में !
किस्मत-ए-इश्क़-ए-दागें पैरहन का इतना सा अफ़साना है,
लाख छाती से लगाये पैरहन को, आखिर तो धुल जाना है ।
- पुलस्त्य
1. किस्मत-ए-इश्क़-ए-दागें पैरहन- कपडे पर लगे दाग के इश्क़ कि किस्मत
2. पैरहन- वस्त्र, कपड़ा
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