Monday, 14 July 2014

रूप तेरा, इश्क़ मेरा !


  
फूलों का रंग 
हवा की तरंग
मेघो की मस्ती 
दिल की उमंग
बनती है तब,

मिलते हैं जब 
रूप तेरा, इश्क़ मेरा !

चंदा से शीतल 
भंवरे सी चंचल 
मधुर बांसुरी सी
बजती है हर पल
होते है जब,

इक दूजे के संग 
रूप तेरा, इश्क़ मेरा !

उमंगो की रवानी 
दरिया का पानी 
कोरे दुपट्टे का
कच्चा रंग धानी 
चढ़ते हैं तब,

मिलते हैं जब 
रूप तेरा, इश्क़ मेरा !

  
-पुलस्त्य





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