कलेजे़ से लगा के रखेगा तुझे
तो वक़्त पत्थर हो जाएगा,
ऐक बहता हुआ दरियाँ है
फिर ये कैसे नयी नस्लों को जतायेगा,
वक़्त की बंजर सतह पर
ऐक फूल सी बहती हो बस तुम,
बीज का वरदान दे कर
हर दौर को बसंत ऋतु कर देती हो तुम,
रहेगा तेरा वजूद रोशन
तो ही समय रवानी पायेगा,
बिन कोख़ तेरी, ऐ स्त्री!
वक़्त मर जाएगा।
-पुलस्तय
तो वक़्त पत्थर हो जाएगा,
ऐक बहता हुआ दरियाँ है
फिर ये कैसे नयी नस्लों को जतायेगा,
वक़्त की बंजर सतह पर
ऐक फूल सी बहती हो बस तुम,
बीज का वरदान दे कर
हर दौर को बसंत ऋतु कर देती हो तुम,
रहेगा तेरा वजूद रोशन
तो ही समय रवानी पायेगा,
बिन कोख़ तेरी, ऐ स्त्री!
वक़्त मर जाएगा।
-पुलस्तय
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