Sunday, 3 March 2019

stri Aur Samay

 कलेजे़ से लगा के रखेगा तुझे
तो वक़्त पत्थर हो जाएगा,
ऐक बहता हुआ दरियाँ है
फिर ये कैसे नयी नस्लों को जतायेगा,
वक़्त की बंजर सतह पर
ऐक फूल सी बहती हो बस तुम,
बीज का वरदान दे कर
हर दौर को बसंत ऋतु कर देती हो तुम,
रहेगा तेरा वजूद रोशन
तो ही समय रवानी पायेगा,
बिन कोख़ तेरी, ऐ स्त्री!
वक़्त मर जाएगा।

-पुलस्तय

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