जबसे तेरे नैना दो पैमाने हो गए
दिन रात झूमते हैं पीने वाले,
और वीरान
शहर के सारे मैख़ाने हो गए ।
ये जोश, ये जज्बा, ये आलमे जुनून,
शराब में नहीं, जो बात तुझमे है
के बेखुदी छोड़
मयकश सारे, परवाने हो गए ।
अब न मयकदे कि वो बेरोशनी राह
ना साकी का तल्ख़ इन्तज़ार,
शराब बन चांदनी बरसी,
अंदाज चाँद के साकियाने हो गए ।
दिल ही में खिचती है दो घूँट
बैठते हैं जब तेरा चेहरा आँखों में उतार कर,
जबसे तुझे खुदा बनाया
जलवे शराब के रूहानी हो गए ।
यूँ ही पिलाती रहना इन आँखों से
वरना ता-उम्र की तौबा,
पी जबसे कोहेनूरी प्यालो में
कच्ची मिट्टी के बाक़ी पैमाने हो गए ।
-पुलस्त्य
दिन रात झूमते हैं पीने वाले,
और वीरान
शहर के सारे मैख़ाने हो गए ।
ये जोश, ये जज्बा, ये आलमे जुनून,
शराब में नहीं, जो बात तुझमे है
के बेखुदी छोड़
मयकश सारे, परवाने हो गए ।
अब न मयकदे कि वो बेरोशनी राह
ना साकी का तल्ख़ इन्तज़ार,
शराब बन चांदनी बरसी,
अंदाज चाँद के साकियाने हो गए ।
दिल ही में खिचती है दो घूँट
बैठते हैं जब तेरा चेहरा आँखों में उतार कर,
जबसे तुझे खुदा बनाया
जलवे शराब के रूहानी हो गए ।
यूँ ही पिलाती रहना इन आँखों से
वरना ता-उम्र की तौबा,
पी जबसे कोहेनूरी प्यालो में
कच्ची मिट्टी के बाक़ी पैमाने हो गए ।
-पुलस्त्य
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