सतह के नीचे
Sunday, 14 September 2014
ईश्क़ का असर
ईश्क़ के असर से कायनात चलाता हूँ मै....
गर्म सांसो से सूरज को हवा देता हूँ .....
ग़म की बदली से पोंछकर चाँद चमकाता हूँ मै....
-पुलस्त्य
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