तेरी आँखो के असर की ये तासीर है,
दो शीशों मे नुमाया मेरी तक़दीर है.....
क़ैद में हूँ इनकी सियाह गहराइयों में,
काजल मे ढली मेरे पँाव की जंज़ीर है ।
-पुलस्त्य
दो शीशों मे नुमाया मेरी तक़दीर है.....
क़ैद में हूँ इनकी सियाह गहराइयों में,
काजल मे ढली मेरे पँाव की जंज़ीर है ।
-पुलस्त्य
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