हर बार, तेरी अनदेखी जब हद से गुज़रने लगी,
टूटते दिल की कराहों से मेरी रूह भी डरने लगी,
तो इस ऐक ख़्याल से दिल को बहला लिया मैंने
तेरी तोहमतों के पैरों के निशाँ को ही
आँखों से लगा लिया मैंने,
के शायद तुम मगरूर नहीं, बस मेरी चाहत की हद ढूँढ रही हो..........
और ये गुनाह मेरे दिल का है
की मेरी मोहब्बत मेरे दिल की गहराइयों में जन्मी है,
तुम मेरे ईश्क़ की गरमी को
अपनी ऊँगलियों से छूँ कर परख सको
इसके ख़ातिर, मेरे दिल का टुकड़ों में टूटना लाज़िमी है...........
-पुलस्त्य
टूटते दिल की कराहों से मेरी रूह भी डरने लगी,
तो इस ऐक ख़्याल से दिल को बहला लिया मैंने
तेरी तोहमतों के पैरों के निशाँ को ही
आँखों से लगा लिया मैंने,
के शायद तुम मगरूर नहीं, बस मेरी चाहत की हद ढूँढ रही हो..........
और ये गुनाह मेरे दिल का है
की मेरी मोहब्बत मेरे दिल की गहराइयों में जन्मी है,
तुम मेरे ईश्क़ की गरमी को
अपनी ऊँगलियों से छूँ कर परख सको
इसके ख़ातिर, मेरे दिल का टुकड़ों में टूटना लाज़िमी है...........
-पुलस्त्य
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