Friday, 27 January 2017

ख़्वाब

गर तू बस ऐक ख़्वाब थी
जो मैंने कभी देखा है........
तो फिर मैं ये कैसे बताऊँ
के मेरी हथेली पे
ये तेरी चूड़ी का टुकड़ा है
या हाथ की रेखा है?.......

-पुलस्त्य

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