Sunday, 12 January 2014

रात

दिन ढले  ही से चलती 
बेचैन तेज हवाओं ने 
रात कि काली जुल्फों
को बिखेर दिया है........
रात के बालों में सजी 
सितारों कि लड़ियां
बिखरी हुई लटों में
कहीं खो गयी हैं
और मखमली दूब में छिपे हुए
जुगनुओं सी
रोशनी का हल्का हल्का सुराग 
छोड़ रही हैं..........
कुछ सांवले बादल 
रात के माथे के टीके चाँद को
बार बार आकर अपने पीछे छिपा लेते हैं, 
और फिर थोड़ी देर के लिये 
बिलकुल चुपचाप खड़े हो जाते हैं।
उनसे छनती रौशनी 
शैतान बच्चो के चेहरे कि दबी दबी सी
हसी जैसी लगती है.......

-पुलस्त्य
  

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