बताओ तो कैसी हो तुम ?
कि कुछ ढ़ल गयी हो,
या वो ही
पूनम के पूरे
चाँद जैसी हो तुम।
याद दिल से जाती नहीं!
ख्याल मैहकते हैं मेरे,
हर शाम
दिल में बयार बनके
बहती हो तुम।
तुम चाहे कुछ न बोलो !
मैं तो सुनता हूँ कनबतियाँ
रोज़ तुम्हारी,
पत्तियों की सरसराहट में
रहती हो तुम।
उफ़ ये तेरे होने का अहसास!
तकता रहता हूँ
कांधे को मेरे,
क़े जैसे
सर रखके सोती हो तुम।
भूलती नहीं वो नजदीकियां!
बेख्याल चूमता रहता हूँ
हथेली अपनी,
यूंं लगता है
हाथ कि रेखा हो तुम।
कभी उदास ना होना प्रिये!
दिल डूबता है
इस ख़्याल से,
कि मेरे आंसुओ में
छिपके रोती हो तुम।
-पुलस्त्य
बयार- Pleasant fragrant wind
कनबतियाँ- something said in the ear
कि कुछ ढ़ल गयी हो,
या वो ही
पूनम के पूरे
चाँद जैसी हो तुम।
याद दिल से जाती नहीं!
ख्याल मैहकते हैं मेरे,
हर शाम
दिल में बयार बनके
बहती हो तुम।
तुम चाहे कुछ न बोलो !
मैं तो सुनता हूँ कनबतियाँ
रोज़ तुम्हारी,
पत्तियों की सरसराहट में
रहती हो तुम।
उफ़ ये तेरे होने का अहसास!
तकता रहता हूँ
कांधे को मेरे,
क़े जैसे
सर रखके सोती हो तुम।
भूलती नहीं वो नजदीकियां!
बेख्याल चूमता रहता हूँ
हथेली अपनी,
यूंं लगता है
हाथ कि रेखा हो तुम।
कभी उदास ना होना प्रिये!
दिल डूबता है
इस ख़्याल से,
कि मेरे आंसुओ में
छिपके रोती हो तुम।
-पुलस्त्य
बयार- Pleasant fragrant wind
कनबतियाँ- something said in the ear
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