Tuesday, 7 January 2014

खुदा

हमको खुदा बना दिया,
छीनके हमसे कू-ए-यार
एक आयत 
में बसा दिया।

डर से खुलने के राजे दिल,
दिल से निकाल कर
मंदिर 
में सजा दिया।

लगे ना ख्वाइशों कि तोहमत
इसलिए तूने,
नूर-ए-ईश्क को
नूर-ए-ईलाही बता दिया।

दिखाये ख्वाब संगमर्मरी,
फिर धड़कते दिल को
हज्र-ए-अस्वद
बना दिया।

जहाँ से सुनाई ना दें
मेरी आहें भी
मुझको इस कदर
ऊँचा उठा दिया।

छुपाने को अपनी तंगदिली 
मेरे मेहबूब ने
स्वांग 
खुदा का रचा दिया। 

-पुलस्त्य

कू-ए-यार - महबूब की गली
आयत      -इस्लाम के धार्मिक ग्रन्थ क़ुरान की सबसे छोटी ईकाई (verses)
हज्र-ए-अस्वद-The Black Stone in the eastern corner of the   Kaaba, symbolising something which is respected but not loved.
नूर-ए-ईश्क- glow of love
नूर-ए-ईलाही- glow of god 





No comments:

Post a Comment