इस दर्द को पहचानता हूँ ़़़़़़मैं ...
किस नस से उठेगा
किस रग में बसेगा
जानता हूँ मैं।
इन आँखों ने शरारत की...
इस दिल की हरारत को
अब इन्हीं के पानी से
उतारता हूँ मैं।
होती नहीं इस मर्ज कि दवा...
पल भर सुकुं पाने को
रह रह बस नाम तेरा
पुकारता हूँ मैं।
इतना दर्द सीने में समाऐ कैसे...
हौसला बढ़ाने को
दर्द है तो खुदा भी है
मानता हूँ मैं।
-पुलस्त्य
हरारत- Fever
नस - Nerve
रग - Vein
किस नस से उठेगा
किस रग में बसेगा
जानता हूँ मैं।
इन आँखों ने शरारत की...
इस दिल की हरारत को
अब इन्हीं के पानी से
उतारता हूँ मैं।
होती नहीं इस मर्ज कि दवा...
पल भर सुकुं पाने को
रह रह बस नाम तेरा
पुकारता हूँ मैं।
इतना दर्द सीने में समाऐ कैसे...
हौसला बढ़ाने को
दर्द है तो खुदा भी है
मानता हूँ मैं।
-पुलस्त्य
हरारत- Fever
नस - Nerve
रग - Vein
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