Saturday, 4 January 2014

दर्द

इस दर्द को पहचानता हूँ ़़़़़़मैं ...
किस नस से उठेगा
किस रग में बसेगा
जानता हूँ मैं।

इन आँखों ने शरारत की...
इस दिल की हरारत को
अब इन्हीं के पानी से
उतारता हूँ मैं।

होती नहीं इस मर्ज कि दवा...
पल भर सुकुं पाने को 
रह रह बस नाम तेरा 
पुकारता हूँ मैं।

इतना दर्द सीने में समाऐ कैसे...
हौसला बढ़ाने को
दर्द है तो खुदा भी है
मानता हूँ मैं।

-पुलस्त्य 

हरारत- Fever 
नस   - Nerve
रग    - Vein

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