रह रह ग़म के झोंके चलते रहे,
हर पल यादों के कांटे चुभते रहे,
और मैं फूल सी मुस्कुराती रहीं,
रात भर आपकी याद आती रही ।
फलक पे एक खेल सा चलता रहा,
बनके तेरा चेहरा चाँद छलता रहा,
नरम चांदनी भी तन जलाती रही,
रात भर आपकी याद आती रही ।
हर आहट एक उम्मीद जगाती रही,
मेरी ही परछाई मुझको सताती रही ,
तेरे साये सी मुझसे लिपट जाती रही,
रात भर आपकी याद आती रही ।
दिल की आतिश मंद हो ना जाये कहीं,
एक भी आंसू आँख से गिरने ना दिया,
आंधी में सूखी पत्ती सी फड़फड़ाती रही,
रात भर आपकी याद आती रही ।
-पुलस्त्य
( A tribute to 'Faiz' and 'Makhdoom')
हर पल यादों के कांटे चुभते रहे,
और मैं फूल सी मुस्कुराती रहीं,
रात भर आपकी याद आती रही ।
फलक पे एक खेल सा चलता रहा,
बनके तेरा चेहरा चाँद छलता रहा,
नरम चांदनी भी तन जलाती रही,
रात भर आपकी याद आती रही ।
हर आहट एक उम्मीद जगाती रही,
मेरी ही परछाई मुझको सताती रही ,
तेरे साये सी मुझसे लिपट जाती रही,
रात भर आपकी याद आती रही ।
दिल की आतिश मंद हो ना जाये कहीं,
एक भी आंसू आँख से गिरने ना दिया,
आंधी में सूखी पत्ती सी फड़फड़ाती रही,
रात भर आपकी याद आती रही ।
-पुलस्त्य
( A tribute to 'Faiz' and 'Makhdoom')
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