कई बार कोशिश की ।
अपना परिचय खुद से कराने की ,
कौन हूँ मै! ये समझ पाने की ।
औरों के मनदर्पण मैं खुद को देखा ,
तो पाया की मन का आइना अक्स नहीं दिखाता ,
तर्जुमा करता है ।
रंग, रूप, जात, धर्म में रंगा तर्जुमा,
आशा, उम्मीद, प्यार,नफरत में बंधा तर्जुमा ।
शख्शियत एक, गोया हर आदमी का अपना अलग तर्जुमा ।
मै, शायद, इन्ही तर्जुमो की गुथी हुई ऐसे माला हूँ जिसमे हर मिलने वाला एक और बीज पिरो जाता है ।
माला कभी पूरी नहीं होती ।
और मेरी खुदी, माला की डोर जैसी,
कहीं छिप के रह जाती है,
जिसका अहसास तो होता है पर दिखाई नहीं देती ।
-पुलस्त्य
अक्स- Image
तर्जुमा- Translation
शख्शियत- Personality
खुदी- Self
अपना परिचय खुद से कराने की ,
कौन हूँ मै! ये समझ पाने की ।
औरों के मनदर्पण मैं खुद को देखा ,
तो पाया की मन का आइना अक्स नहीं दिखाता ,
तर्जुमा करता है ।
रंग, रूप, जात, धर्म में रंगा तर्जुमा,
आशा, उम्मीद, प्यार,नफरत में बंधा तर्जुमा ।
शख्शियत एक, गोया हर आदमी का अपना अलग तर्जुमा ।
मै, शायद, इन्ही तर्जुमो की गुथी हुई ऐसे माला हूँ जिसमे हर मिलने वाला एक और बीज पिरो जाता है ।
माला कभी पूरी नहीं होती ।
और मेरी खुदी, माला की डोर जैसी,
कहीं छिप के रह जाती है,
जिसका अहसास तो होता है पर दिखाई नहीं देती ।
-पुलस्त्य
अक्स- Image
तर्जुमा- Translation
शख्शियत- Personality
खुदी- Self
बहुत शानदार , आपकी लेखनी को सादर नमन
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