कहीं कुछ न कुछ तो बात है
होठो पे हंसी, ऑंखें उदास हैं ....
इतना तो न बोलती थी तुम
अब हर बात पे कुछ कहती हो,
तब हर लफ़्ज़ खनकता था
अब जो कहती हो दास्ताँ, उदास है.....
-पुलस्तय
होठो पे हंसी, ऑंखें उदास हैं ....
इतना तो न बोलती थी तुम
अब हर बात पे कुछ कहती हो,
तब हर लफ़्ज़ खनकता था
अब जो कहती हो दास्ताँ, उदास है.....
-पुलस्तय
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