बहार भी आयी, चाँद भी निकला, और खिले फ़ूल भी
पर हमें तो पता ही ना चला रोज़मरा की जद्दोजहद में ।
ता उम्र, रोज़ाना, शिद्दत से खोदते रहें हम क़ब्र अपनी ।
-पुलस्तय
पर हमें तो पता ही ना चला रोज़मरा की जद्दोजहद में ।
ता उम्र, रोज़ाना, शिद्दत से खोदते रहें हम क़ब्र अपनी ।
-पुलस्तय
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