वजह कुछ और नहीं के बेखुदी मे छलक रही है जाम-ए-मय तेरे मुह से लगी हुई,
बेसब्र पैमाना चूमता है लब तेरे, या मय नमाज़ी है तेरी आँख के सिजदे में झुकी हुई ।
-पुलस्तय
बेसब्र पैमाना चूमता है लब तेरे, या मय नमाज़ी है तेरी आँख के सिजदे में झुकी हुई ।
-पुलस्तय
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