सुरमई ठण्ड मे, महकती वादी की
रेशमी दूब पर,
सोने में ढली पहाड़ीयों के पीछे से झांकते हुऐ सूरज की अालसी किरणे
जब होले होले बिखरती है,
तो जो समां बनता है
उसका रंग तेरी आँखों के रंग से
बिलकुल मिलता है ....
-पुलस्तय
रेशमी दूब पर,
सोने में ढली पहाड़ीयों के पीछे से झांकते हुऐ सूरज की अालसी किरणे
जब होले होले बिखरती है,
तो जो समां बनता है
उसका रंग तेरी आँखों के रंग से
बिलकुल मिलता है ....
-पुलस्तय
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