मत पूछ मुझसे क्या था मेरा रंग बाग़-ए-बहार में
मेरी नज़र के फूल पर ही देर से शबाब आया है...
अब रंग देखती जा तू ऐ शमा बज़्म मे परवाने का
तेरी आँखों से छलकी मय रगों मे उतार, आया है....
-पुलस्तय
मेरी नज़र के फूल पर ही देर से शबाब आया है...
अब रंग देखती जा तू ऐ शमा बज़्म मे परवाने का
तेरी आँखों से छलकी मय रगों मे उतार, आया है....
-पुलस्तय
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