सतह के नीचे
Friday, 5 February 2016
एक मुलाकात की कुछ यादें
होंठ जैसे पंखुड़ी गुलाब की,
रंगत चेहरे की रेशमी ख्वाब सी,
देती इसे जिंदगी तेरी आँखे....
दो छलकती झीलें शराब की।
-पुलस्तय...
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