हम मिलें हैं पहले भी कई बार.....
यकीनन गुजर चुकी है तेरी रंगो बू
मेरे हसीं ख्वाब से ,
मैंने ही तराशा है भर के आँखों में तुझको....
बिखारतीं हैं मेरी नज़र की शुआऐं
तेरे जिस्म की मेहराब से,
या कभी उठा के देख ले...
हर पुरजे पे लिखा होगा नाम तेरा
मेरी जवानी की किताब के ,
औढ़ले जुल्फों की बदलीयां
पर तू छिपी न रह सकेगी.....
पहचानता हूँ मैं तुझे तेरी शराब से ।
-पुलस्तय
यकीनन गुजर चुकी है तेरी रंगो बू
मेरे हसीं ख्वाब से ,
मैंने ही तराशा है भर के आँखों में तुझको....
बिखारतीं हैं मेरी नज़र की शुआऐं
तेरे जिस्म की मेहराब से,
या कभी उठा के देख ले...
हर पुरजे पे लिखा होगा नाम तेरा
मेरी जवानी की किताब के ,
औढ़ले जुल्फों की बदलीयां
पर तू छिपी न रह सकेगी.....
पहचानता हूँ मैं तुझे तेरी शराब से ।
-पुलस्तय
No comments:
Post a Comment