यार दोस्त भी अब मुझसे कतराने लगे हैं,
सबको फ़रिश्ता बनाने की कोशिश है मेरी।
हंस बोल लेते थे, अब डरे डरे से आते हैं,
घर मेरा अब महफ़िल नहीं, अदालत है मेरी।
ताकि यूँ ही बरक़रार रहे ये शौक़-ए-मसीहाई,
अब हर शय में शैतान ढूँढने की आदत है मेरी।
लगी लत कैसी ये हर दम आग बुझाने की,
अब काँधे पे मश़क और जेब में माचिस है मेरी।
-पुलस्तय
मशक-a leather container used to store water and carried on shoulder
सबको फ़रिश्ता बनाने की कोशिश है मेरी।
हंस बोल लेते थे, अब डरे डरे से आते हैं,
घर मेरा अब महफ़िल नहीं, अदालत है मेरी।
ताकि यूँ ही बरक़रार रहे ये शौक़-ए-मसीहाई,
अब हर शय में शैतान ढूँढने की आदत है मेरी।
लगी लत कैसी ये हर दम आग बुझाने की,
अब काँधे पे मश़क और जेब में माचिस है मेरी।
-पुलस्तय
मशक-a leather container used to store water and carried on shoulder
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