Tuesday, 5 November 2013

एक लड़की


एक  खोई  खोई सी लडकी 
दूर  शितिज  को देखते   हुई,
हौले से अपनी  सुनहरी  
नर्म जुल्फों  में जब उंगलिया फिराती  है,
बस  उसे  
देखते रहेने को दिल करता  है
जिंदगी ठहर सी जाती है।

गहरी झील सी ठहरी आँखों में
मीठी सी कोई शिकायत लिए 
करती है रब से यूँ ही बातें 
या बस अकेले में रह रह गुनगुनाती है,
रूकती है धड़कन
जब उसके होठो की नर्म पंखुडियां
हौले से कंपकपाती हैं ।

हथेली  पे टिकाये चाँद सा चेहरा 
तीरछी गर्दन की सुराही किये
गुलाबी शबनम से उसके गालो को 
चूमती बेबाक लटो को जब 
गुस्से से  वो हटाती है,
सरसराती हैं जोश में हरी पत्तियां 
जैसे हवा भी मुस्कुराती है ।

-पुलस्त्य

  

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