तुझसे ये दूरी अब मुझे इस नए अंदाज मे तडपाती है ।
के भुलाने लगा हूं तेरा चेहरा, तेरी याद बढ़ती जाती है ।।
गुम गया चेहरा गर, हर आह मे रहेगा तेरा अहसास ।
आतिश ये मेरे दिल मैं, तेरी नर्म सांसो से हवा पाती है ।।
कभी देख, भूली नहीं है तू भी उन पलों की सरगोशियाँ ।
ओढे ख़ामोशी, नम्म आंखे लिए क्यूँ बेवजह मुस्कुराती है ।।
मैं पतंगा हूं, यूँ भी बस प़ल दो प़ल मे मिट जाऊंगा ।
शम-ए-खामोश, क्यूँ नहीं एकबार झूम के ज़ल जाती है ।।
-पुलस्त्य
के भुलाने लगा हूं तेरा चेहरा, तेरी याद बढ़ती जाती है ।।
गुम गया चेहरा गर, हर आह मे रहेगा तेरा अहसास ।
आतिश ये मेरे दिल मैं, तेरी नर्म सांसो से हवा पाती है ।।
कभी देख, भूली नहीं है तू भी उन पलों की सरगोशियाँ ।
ओढे ख़ामोशी, नम्म आंखे लिए क्यूँ बेवजह मुस्कुराती है ।।
मैं पतंगा हूं, यूँ भी बस प़ल दो प़ल मे मिट जाऊंगा ।
शम-ए-खामोश, क्यूँ नहीं एकबार झूम के ज़ल जाती है ।।
-पुलस्त्य
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