अगर
तेरे जुल्म कि
ये इंतिहा नहीं
तो और क्या है?
के रोती आँखों को तेरी उम्मीद तक नहीं....
और पल भर आँख लगते ही,
तुम आँखों मैं उतर आती हो !
-पुलस्त्य
तेरे जुल्म कि
ये इंतिहा नहीं
तो और क्या है?
के रोती आँखों को तेरी उम्मीद तक नहीं....
और पल भर आँख लगते ही,
तुम आँखों मैं उतर आती हो !
-पुलस्त्य
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