Tuesday, 5 November 2013

ज़िंदगी

हर सुबह एक नयी चाह....
कुछ हांसिल हुआ 
कुछ की हसरत रह गयी,
जो मिल गया वो धुँअा हुआ
जो रह गया जला गया
रात भर रुला गया,
जगे तो कुछ और याद न रहा
बस वही, 
एक और नयी सुबह, एक और नयी चाह ।

-पुलस्त्य 
  

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