Tuesday, 5 November 2013

याद


दिल को तू याद आये एैसे, 
दिल से धड़कन बिछड़ जाये जैसे,
रो रो कर आसमाँ सर पे उठा रखा है,
इस दीवाने दिल को कोई समझाए कैसे?

तेरे ख्वाब आ आ रुलाते हैं,
रात भर एक टीस सी उठती रहती है,
पल भर को नींद नहीं आँखों में तो बता,
खुली आँखों को कोई जगाये कैसे?

चश्म- ऐ-नम, मुस्कुराता हूँ, 
लोग फिर भी हालत पे सवाल करते हैं,
कफ़न तो चटख डाल दिया लेकिन,
लाश को कोई  चलना  सिखाऐ कैसे? 

काश  तेरे गम में मर ही जाते,
लेकिन, जान भी तुझी में अटकी है,
अब तू ही रहा बता ऐ मसीहा मेरी,
जान आ मिले, या मेरी जान जाये कैसे?

-पुलस्त्य   


  

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