आजकल मन अक्सर जब अकेला होता है
तो दिल के एक जिन्दा बचे कोने मे सहेज कर रखे
तेरी यादों के टुकड़े निकाल लेता है
और आँखों की चादर बिछाकर उस पर टुकड़ा टुकड़ा सजाता है,
पर अब पहले सी तेरी तस्वीर नहीं बनती
अक्स तो फिर भी तुझसे मिलता जुलता है
तासीर नहीं मिलती।
-पुलस्त्य
तो दिल के एक जिन्दा बचे कोने मे सहेज कर रखे
तेरी यादों के टुकड़े निकाल लेता है
और आँखों की चादर बिछाकर उस पर टुकड़ा टुकड़ा सजाता है,
पर अब पहले सी तेरी तस्वीर नहीं बनती
अक्स तो फिर भी तुझसे मिलता जुलता है
तासीर नहीं मिलती।
-पुलस्त्य
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