Sunday, 17 November 2013

ख़्वाब

हाल कुछ ऐसा है 
मेरे ख्वाबो कि तामीर का,
आँखों मैं उभर आता है तेरा चेहरा
रंग लिए मेरी तक़दीर का ।

धुआँ धुआँ ये रात है 
जैसे घुलना अब्र मै अबीर का,
मेरे दिल के आसमां पे गुलाबी चाँद 
है टुकड़ा तेरी तस्वीर का ।  

तय हुआ 
बंधना तुझसे मेरी तक़दीर का,
तेरे चहरे पे ये बल खाती ख़म लट
छल्ला है मेरी जंजीर का ।

-पुलस्त्य   

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