हाल कुछ ऐसा है
मेरे ख्वाबो कि तामीर का,
आँखों मैं उभर आता है तेरा चेहरा
रंग लिए मेरी तक़दीर का ।
धुआँ धुआँ ये रात है
जैसे घुलना अब्र मै अबीर का,
मेरे दिल के आसमां पे गुलाबी चाँद
है टुकड़ा तेरी तस्वीर का ।
तय हुआ
बंधना तुझसे मेरी तक़दीर का,
तेरे चहरे पे ये बल खाती ख़म लट
छल्ला है मेरी जंजीर का ।
-पुलस्त्य
मेरे ख्वाबो कि तामीर का,
आँखों मैं उभर आता है तेरा चेहरा
रंग लिए मेरी तक़दीर का ।
धुआँ धुआँ ये रात है
जैसे घुलना अब्र मै अबीर का,
मेरे दिल के आसमां पे गुलाबी चाँद
है टुकड़ा तेरी तस्वीर का ।
तय हुआ
बंधना तुझसे मेरी तक़दीर का,
तेरे चहरे पे ये बल खाती ख़म लट
छल्ला है मेरी जंजीर का ।
-पुलस्त्य
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