छुपकर तकने चाँद को
ओढ़ अन्धेरा निकली,
सर्दी की वो रात,
झम झम बरसी चांदनी
ऐसी आग लगायी,
सुलगी, पिंघली भोर तक
बन शबनम ढल अायी।
-पुलस्त्य
ओढ़ अन्धेरा निकली,
सर्दी की वो रात,
झम झम बरसी चांदनी
ऐसी आग लगायी,
सुलगी, पिंघली भोर तक
बन शबनम ढल अायी।
-पुलस्त्य
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